Description of the Book:
कुछ अधूरी रहकर भी परसुकून, कुछ पूरी होकर भी बेचैन ख्वाहिशें की झलक है ये।
कुछ हकीकत तो कुछ फ़साने हैं। कुछ आप बीती। कुछ जग बीती।
कुछ भीड़ में तो कुछ तन्हाई में मिले एक खलिश की झलक है ये।
हज़ार ख्वाहिशें, एक खलिश
SKU: 9789395255936
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