Description of the Book:
कौन हूँ मैं ? मेरे मित्र कौन है ?
सफलता क्या है ? नाकामयाबी क्या है ?
इंसानियत क्या है ? सपने क्या हैं ? अपने क्या हैं ?
ये कुछ ऐसे प्रश्न हैं , जिनके उत्तर हर मनुष्य को स्वयं खोजने होते हैं।
समत्व - शब्द से सम तक, एक संक्षिप्त काव्य संग्रह है, जो मनुष्य के जीवन और व्यक्तित्व के भिन्न - भिन्न पहलुओं से प्रेरित है। मनुष्य अपने जीवनकाल में कईं किरदार निभाता है, कईं क्षेत्रों में अपनी रूचि पाता है। प्रायः अपने ही विचारों में उलझकर असमंजस में आ जाता है। ये कविताएं दिन - प्रतिदिन की घटनाओं में समत्व ,अर्थात स्थिरता व संतुलन ढूंढने का प्रयास करती हैं। इन रचनाओं में कला, दर्शन एवं आध्यात्म का अनूठा समागम है, जिनमें मानव मन की सहजता एवं जटिलता का वर्णन है। मन में उठती आशा - निराशा, इच्छाओं और सपनों का वर्णन है । इनमें अनेक प्रश्नों के उत्तर भी हैं, और कईं नए प्रश्न भी।
समत्व : शब्द से सम तक
Author's Name: Shrijeeta Mishr About the Author: स्याही और शब्दों से श्रीजीता का सम्बन्ध पुराना है - उन्होंने अपनी पहली कविता १० वर्ष की अल्पायु में लिखी । ऐसा होना स्वाभाविक है क्योंकि वे एक ऐसे परिवार से आती हैं जहाँ सदैव साहित्य और कला का वातावरण रहा है। कविता लिखने के साथ, उन्होंने पद्म भूषण गुरु डॉ. सरोजा वैद्यनाथन जी से भरतनाट्यम का प्रशिक्षण लिया है। वे अध्यात्म, दर्शन व भारतीय संस्कृति एवं कला में अत्यंत रूचि रखती हैं। वे मानती हैं कि स्वयं के विचारों की परिपूर्ण अभिव्यक्ति केवल कला के माध्यम से ही संभव है, क्योंकि कला अंतरात्मा की भाषा होती है। यह काव्य संग्रह उनके अंतर्मन के उन विचारों व भावनाओं का दर्पण है, जिन्हे वे अपने शब्दों द्वारा व्यक्त करती हैं। श्रीजीता मिश्र का जन्म २००३ में, ओडिशा में हुआ, और उनका बचपन राजस्थान में बीता। वर्तमान में वे दिल्ली में वास करती हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्री राम कॉलेज में समाजशास्त्र का अध्ययन कर रही हैं। उन्होंने अपने विद्यालय एवं महाविद्यालय में अनेक विधाओं, जैसे वाद - विवाद, प्रश्नोत्तरी, नृत्य, कहानी लेखन एवं लोक भाषण में अपनी प्रतिभा दिखाई है एवं अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर अपने संस्थान के दल का नेतृत्व किया है। वे एक NCC कैडेट हैं, और भविष्य में लोक सेवा में अपना योगदान देने की अभिलाषा रखती हैं। Book ISBN: 9789357693202
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