काल बाह्य हो चुकी नीतियों पर अंधश्रद्धा ने आत्मघाती प्रथाओं को पुरजोर बढ़ावा दिया जिससे कालांतर में रक्त संबंधियों के बीच भी नाना प्रकार की भेदकारी समझ को विकसित होने का अवसर मिले और भिन्न सभ्यताओं के आक्रमण का प्रतिकार करने में असफल रहे। देश टूटता और टुकड़ों में बंटता चला गया।आस्थाओं के घालमेल ने अंग्रेजों के भारत को भी तीन टुकड़े कर दिया। बीस लाख निर्दोष बेमौत मरे। घिनौनी दीवारों में जकड़ी मानवता के उद्धार के लिए,,,,तथ्यपरक संदेश है__सभी संसारवासी सहोदर हैं ।
सबै संसारी सहोदरा
Author’s Name: Jata Shankar Aatrey
About the Author: सवा छः दशक पूर्व विहार के बेतिया में अवतरण,दर्शनशास्र का सेवानिवृत व्याख्याता, सत्याग्रह से जनहित पोषण, युवकोचित ऊर्जा के साथ सामाजिक सरोकार में व्यस्त,राष्ट्रसेवा के लिए कुछ भी करने को तत्पर,सर्वधर्म समभाव और वसुधैव कुटुंबकम् के अहर्निश एकल स्वैच्छिक व्याख्याता,पाक्षिक पत्रिका युगबोध का संपादन,नाट्य लेखन, नेपाल के रेडियो संस्कृति पर साप्ताहिक प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम संचालन,पतनोन्मुख राजनीति के विरूद्ध प्रजातांत्रिक मूल्य आधारित राजनीति को रेखांकित करने वास्ते संसदीय चुनाव में भागीदारी, पटना के कालिदास रंगालय में समाजसेवा में उल्लेखनीय कार्यों के लिए शिखर सम्मान,जानकी जन्मभूमि सीतामढ़ी के देहात में स्थायी पैतृक घर।
Book ISBN: 9781807154455
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