Description of the Book:
संभल जा, थोड़ा बिगड़ जा..मोनिका के जीवन का यात्रा वृत्तांत है जो कवियित्री मोनिका ने अपने १० साल, २०११ से २०२२ तक के सफर में जितना भी अनुभव जिया है, जो कुछ भी इस जीवन, प्रेम की भावना, किशोरावस्था से अपनी युवावस्था में प्रवेश, और इन २१ दिनों के बीच में महसूस किया है ...
कभी अपना आत्मा मंथन करते हुए, संभलते-बिगड़ते, मन मौजी होकर कुछ शब्दों के बीच अपने आप को ढूढने की कोशिश की है, तो कभी पहले, दूसरे तीसरे और प्यार होते रहने की अपनी भावनाओ और रोमांच को व्यक्त किया है, कभी लोकल ट्रैन के एक कोने में बैठी उस महिला के अंदर चल रहे भावनाओ के सागर को पढ़ने की कोशिश की, तो कभी किशोरावस्था में रहे सेलिब्रिटी क्रश से रास्ते में यूँही टकरा जाने की ख़ुशी लेकिन युवास्था में उसी उतावलेपन को काबू करने की कोशिश करती हुयी विनोदपूर्ण पंक्तियाँ रची हैं
वो भी क्या कवी जो अपनी कविताओं में मौसम का जिक्र न करे , मुंबई की जून की पहली बारिश और देहरादून की सर्दियों वाली गुनगुनी धूप का एहसास आपको तब होगा जब आप यात्रा वृतांत में बंधे रहेंगे.
साथ ही मोनिका इस किताब के शीषर्क के ज़रिये खुद से और हर व्यक्ति से ये कहना चाहती है की जीवन जीने के लिए आपको थोड़ा बिगड़ने और थोड़ा सँभलने की जरुरत है, हर अवस्था में संभलने और बिगड़ने का अनुपात बस आपको पता होना चाहिए.
संभल जा, थोड़ा बिगड़ जा
Author's Name: Monika Deshwal About the Author: Monika Deshwal is a poet, filmmaker and a theatre artist. She is working in Mumbai as an assistant director and has been a part of many short films, documentaries, films and webseries with good production houses. She likes to compose poetry in her leisure hours. She is a post graduate in communication from Doon university, Dehradun. She has documented a short documentary and a short film and aspires to write lyrics and shoot songs based on her poetry. Book ISBN: 9789357694230
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