प्रस्तुत ग़ज़लें मेरे हृदय की सबसे अंतरंग, सबसे निजी यात्राओं की स्वीकृति है। यह पुस्तक उन बेचैन रातों की ताबीर है, जिन्होंने जीवन के आकर्षक और कुरूप, सजीव और निर्जन—सभी पहलुओं की परछाइयों को मेरे भीतर अंकित किया। ग़ज़लें, जो प्रायः विरह, मिलन, समर्पण और विरोधाभास जैसे प्रेम के अभिज्ञान पर रची जाती हैं, यहां ‘विरक्ति’ की बारीकियों पर केन्द्रित हैं—वह विरक्ति, जो केवल प्रेम का विलोम नहीं, बल्कि उसका अगला, अधिक सुक्ष्म, अधिक परिपक्व रंग है।
सितम-ए-हिज्र
Author’s Name: सौरव सिंह ' नाथ '
About the Author: सौरव सिंह, जिनका जन्म सन् 1997 में एक सुसम्पन्न परिवार में हुआ, साहित्यिक जगत में अपने तख़ल्लुस “नाथ” के नाम से जाने जाते हैं। बचपन से ही ग़ज़ल-लेखन में उनकी गहरी अभिरुचि रही है। विद्यालयीन दिनों से आरम्भ हुई यह रुचि धीरे-धीरे उनकी पहचान बन गई । सौरव केवल रचनाकार ही नहीं, बल्कि Poetrycontestorganiser के संस्थापक भी हैं
Book ISBN: 9798900814148
.png)
