मेरी जो कविताएं हैं वो स्त्रियों पर हैं, मेरी कविताएं स्त्रियों को ये बताने के लिए हैं की वो कमजोर नहीं हैं वो चाहे तो क्या नहीं कर सकती हैं परन्तु वो पहला कदम बढ़ाने से डरती हैं, पहली बार आवाज़ उठाने से डरती हैं, और शायद आगे बढ़ने से भी डरती हैं।ये कविताएं समाज को भी ये समझाने के लिए हैं की शिक्षा पर सभी का बराबर अधिकार हैं, आज़ादी सभी को अच्छी लगती हैं स्त्रियों को भी, ये सोचकर की बेटी या बहु को पढ़ाने या आगे बढ़ाने से क्या मतलब, तो जान जाइये की आप दुनिया से बहुत पीछे चल रहे हैं या ये कहे की दुनिया भाग रही हैं और आप ठहर गए हैं। हमारे देश की स्त्रिया दूसरे देश में जाकर अपना और भारत का नाम रोशन कर रही हैं परन्तु खुद के देश में ही उन्हें वो सम्मान और मौका नहीं मिल रहा हैं।
स्त्री
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Author’s Name: पिंकी सिंह
About the Author: "मैं पिंकी सिंह, मैंने श्रीमती नाथीबाई दामोदर ठाकरसे महिला विश्वविद्यालय मुंबई से स्नातक और अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की है। वर्तमान में मैं मध्यप्रदेश में निवास करती हूँ। बचपन से ही मुझे साहित्य, विशेषकर कविताएँ और कहानियाँ लिखने का गहरा शौक रहा है। कॉलेज के दिनों में जब भी मन में भावनाओं का सागर उमड़ता, तो वह कागज़ पर शब्दों का रूप ले लेता। धीरे-धीरे यह शौक मेरा जुनून बन गया और मैंने अपने आस-पास की दुनिया, लोगों की संवेदनाओं और समाज की हलचल को अपनी कविताओं में पिरोना शुरू कर दिया।"
Book ISBN: 9781807155179
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