“शब्दों के घरौंदे” काव्य-संग्रह में मेरे उन एहसासों, विचारों और सपनों की झलक है,जिन्हें मैंने अपनी कलम से शब्दों की माला में पिरोया है। ये कविताएँ जीवन के छोटे-बड़े पलों से उपजे भावों की सच्ची अभिव्यक्ति हैं—जिसमें प्रेम की कोमलता,विरह की पीड़ा,आशा की किरण और जीवन के प्रश्नों की गूंज है। इस काव्य-संग्रह का नाम “शब्दों के घरौंदे” इसलिए रखा गया क्योंकि मेरे लिए हर कविता एक ऐसा घरौंदा है,जिसे मैंने अपने अनुभवों, स्मृतियों और कल्पनाओं के तिनकों से बुना है। इस घरौंदे में मैंने अपनी संवेदनाओं की रेत से दीवारें बनाई हैं और शब्दों से छत।
शब्दों के घरौंदे
Author’s Name: रीतू वर्मा 'अम्बालवी'
About the Author: डॉ. रीतू वर्मा 'अम्बालवी' हरियाणा के अंबाला शहर ज़िले की रहने वाली एक संवेदनशील और बहुआयामी कवयित्री हैं, जिनकी रचनाओं में आत्मानुभूति, भावनात्मक गहराई और जीवन के विविध रंग झलकते हैं। उन्होंने हिंदी में एम.ए., एम.एड. और पीएच.डी. की उपाधियाँ प्राप्त की हैं। काव्य के प्रति उनका प्रेम बचपन से रहा है। उन्होंने कई राज्य व विश्वविद्यालय स्तरीय प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीते और अपनी उत्कृष्ट लेखन कार्य के लिये वर्ष 2002 में 'हरिवंश राय बच्चन सम्मान' से भी सम्मानित की गई। महामारी काल में उन्होंने अपनी रचनात्मक ऊर्जा को एक दिशा दी, जिसका सजीव प्रमाण है— उनका काव्य-संग्रह "शब्दों के घरौंदे",जो उनके विचारों और संवेदनाओं का सुंदर प्रतिबिंब है।
Book ISBN: 9798898652043
.png)
