Description of the Book:
कुछ लम्हे कुछ बातें
कुछ हसीं कुछ नहीं
पिरोकर लाएं हैं
आपकी महफ़िल में।
इन मोतियों में से कुछ
पसंद आये तो सजा लेना
न आये तो छुपा देना
पहली कोशिश की है
हो सकता है
हम इस क़ाबिल नहीं।
लब्ज़ों की भीड़ में
जज़्बातों के ढेर से
चंद और अपना लेना
मुश्किल भी नही।
लम्हे
SKU: 9789360948931
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