लिखी हुई ख़ामोशियाँ उन भावनाओं का संग्रह है जो बोलने से पहले भीतर ठहरती हैं। यह किताब शोर के विरुद्ध नहीं, बल्कि उस ख़ामोशी के साथ खड़ी है जो धीरे-धीरे शब्द बन जाती है। इन कविताओं में प्रश्न हैं, स्वीकार है, टूटन है और ठहराव भी। यह संग्रह उनके लिए है जो महसूस तो बहुत कुछ करते हैं, पर हमेशा कह नहीं पाते। यह किताब जवाब नहीं देती—बस ईमानदारी से साथ बैठती है।
लिखी हुई ख़ामोशियाँ
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