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Description of the Book:

तमाम तहरीरें अलग-अलग मुद्दों पर आधारित हैं। हर तहरीर का एहसास अलग है, हर एक का नज़रिया अलग है। कुछ में ज़माने की सच्चाई का ज़िक्र है, कुछ में ज़िंदगी की कशमकश का। कुछ में आज के वक़्त में लोगों की ज़हनियत का ज़िक्र है, कुछ में लोगों की उस ज़हनियत पर मेरे ख़्यालों का। 
लेकिन ये जो भी बातें हैं, ये ख़ुदा की बनाई इस खूबसूरत ‘रचना’ में पाई जाती हैं। लिहाज़ा, इस किताब का नाम भी रचना है।
साथ ही, ज़िंदगी में कला का एक अपना महत्तव है। कला, एक ऐसी चीज़ है जो लोगों को जोड़ती है। तमाम मज़हबों, जातों, वतनों को जोड़ने का काम, कला करती है। कला के चलते हम हैं, कला के चलते ही ज़िंदगी है और कला के चलते ही ज़िंदगी जीने का जज़्बा। सदियों से चली आ रही, कला एक ऐसी रीत है जो आज तक बूढ़ी ज़रूर हुई, मगर कभी कमज़ोर नहीं पड़ी- चाहे वो नृत्य हो, संगीत हो, पेंटिंग हो या लिखने की कला। चंद शब्दों में बताऊँ तो कला, ख़ासतौर पर लिखने की कला, दुनिया का सार लिखने का औज़ार है। ये दुनिया भले कितनी भी तरक़्क़ी कर ले, कला की जगह न तो आज तक कोई चीज़ ले पाई है, ना कभी ले पाएगी।
मगर फिर भी, आज कला को उस इज़्ज़त से नहीं नवाज़ा जाता जिससे उसे नवाज़ा जाना चाहिए। जैसे कि, माँ-बाप का बच्चे की कलाकार बनने की ज़िद को टालना आम बात है। कोई कितना भी खुले दिल वाला न हो, कलाकार बनने के नाम से ही उसके मुंह का स्वाद बेमज़ा हो जाता है। सबब- ज़्यादा पैसा न कमा पाना। लोग अक्सर सोचते हैं कि कला महज़ मनोरंजन और दिल बहलाने के लिए ठीक है, मगर इसे पेशा नहीं बनाया जा सकता क्योंकि कला से ज़्यादा पैसा नहीं कमाया जा सकता। एक और कारण है ( बदक़िस्मती से), लोगों का मानना कि कलाकार बनना परिवार की शान के ख़िलाफ़ है।
ऐसे में ज़रूरी है कि हम सब अपना नज़रिया बदलें और महज़ पैसा और शोभा बनाने को जीने का मक़सद न बनाएँ।
इस किताब में कुछ नफ़सियाती, रूहानी और दिली बातें ख़ुदा की ग़नीमत के बदौलत लिखकर, मैं बस सबसे एक मुकम्मल इंसान बनने की राह पर चलने की गुज़ारिश करना चाहता हूँ: एक ऐसा इंसान जो हारकर भी कभी हार न माने, अपनी जड़ों से भली-भाँति वाक़िफ़ हो, इंसानियत उसका कर्म, धर्म, दोनों हो, अपने आप से एक गहरा रिश्ता बनाए, ज़माने के बनाए कुछ पैमानों को मिटाए और कला जैसी हर पाक-पवित्र चीज़ का दिल से स्वागत करे।
अगर कही किसी को कोई बात न भाए तो मैं दिल से माफ़ी चाहूँगा, मेरा मक़सद किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है।

रचना

SKU: 9789395087575
₹110.00Price
  • Author's Name: Abhimanyu Bakshi 
    About the Author: A passionate Hindi, Urdu and Punjabi poet and thus, a proud Indian! For me, poetry is a way of expressing my opinion, enlightening a lamp of hope inside everyone and addressing the important issues of today's world; youth being the most important one. निकला हूँ मैं कई गुमशुदाओं की तलाश में,विरले वो अरमान कहाँ गए…,हिंदू हैं मुस्लिम हैं, हैं सिख भी यहाँ,न जाने ये इंसान कहाँ गए!!…
    ISBN: 9789395087575

     

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