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कुछ रिश्ते पूरे नहीं होते, पर छूटते भी नहीं।
रंजिश ही सही उन्हीं रिश्तों की किताब है
जहाँ इंतज़ार आदत बन जाता है, और ख़ामोशी
सबसे सच्ची ज़ुबान।
इन कविताओं में न कोई इल्ज़ाम है,
न कोई गुज़ारिश; सिर्फ़ वह ठहराव है
जो किसी के चले जाने के बाद मन में रह जाता है।
यह किताब कहती नहीं, समझती है।
अगर आपने भी कभी किसी को चाहा हो
बिना उसे रोक पाए, तो शायद
यह किताब आपके लिए है।

रंजिश ही सही

SKU: 9789375108160
₹110.00Price
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    Author Details :

    Author's Name: Rachit Pasrija

    About the Author: रचित एक स्वतंत्र लेखक और कविताओं के पाठक हैं। उनकी लेखनी उन अनुभवों से जन्म लेती है जहाँ भावनाएँ कहे बिना भी मौजूद रहती हैं। वे अपनी कविताओं में इंतज़ार, ख़ामोशी और अधूरेपन जैसे विषयों को सरल और ईमानदार भाषा में प्रस्तुत करते हैं। उनका लेखन किसी निष्कर्ष पर पहुँचाने की कोशिश नहीं करता, बल्कि पाठक के साथ ठहरने का प्रयास करता है। रंजिश ही सही उनकी पहली कविता-संग्रह है।

    Book ISBN: 9789375108160

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