Description of the Book:
मशाल
एक हसास इंसान का शायर या कलाकार होना ज़रूरी नहीं है। लेकिन एक शायर या कलाकार का थोड़ा हसास (संवेदनशील) होना, मेरे ख़याल से बहुत ज़रूरी है।
अब इसकी अपनी दिक्कतें हैं; जो किसी और को रोज़ मर्रा की चीज़ लगे, वो शायद आपको झिंझोड़ के रख दे और आपको कुछ लिखने पे मजबूर कर दे, या जो भी आपका हुनर है, उस रास्ते से वो दुनिया के सामने आ जायेगा। तो कुछ ऐसे ही मेरे ज़िन्दगी के एहसासात को मैंने मेरी समझ मुताबिक़ नज़्मों, ग़ज़लों में उतारा है। कोई खुद से दो चार होते हुए, कोई ज़माने से कोई सवाल करते हुए और कोई शायर की सोच की उड़ान, बस ये सब आप तक पुहंचाने की कोशिश ही ये शायरी का पुलिंदा है।
ये मशाल इन्किलाबी ना सही, मग़र ख़ुद को रौशन करने की कोशिश ज़रूर है। उम्मीद है, पढ़ने, सुनने वालों को पसंद आएगी।
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SKU: 9789360947460
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