“मन के काग़ज़ पर” दिल के उन अनकहे जज़्बातों की कहानी है, जो शब्दों में ढलते-ढलते एहसास बन गए। सुष्मिता मिश्रा की यह काव्य-यात्रा प्रेम, विरह, यादें और आत्मसंवाद का संगम है। हर कविता एक आईना है — कभी मुस्कुराता हुआ, कभी नम आँखों वाला। सादगी और गहराई के मेल से लिखी यह पुस्तक पाठक को अपने भीतर झाँकने का निमंत्रण देती है — जहाँ शायद आप खुद को फिर से पा लें।
मन के काग़ज़ पर
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