Description of the Book:
ज़िंदगी की कश्मकश में अक्सर कुछ बाते हम कह जाते है और कुछ यूंही दिल के किसी कोने में रह जाती है.... एक कवि के लिए कविता से अच्छा माध्यम क्या हो सकता है उन अनकही बातों को कहने का । अपनी उलझन को हल करते हुए अपनी बातो को शब्दो में पिरोने की मैने कोशिश की है....कोशिश की है अपनी कविताओं से आपके भी मन की बात रख सकू... इन कविताओं को लिखने की प्रेरणा मुझे हर उस इंसान से मिली जो कभी न कभी मेरी जिंदगी का बहुत ही अहम हिस्सा रहा है। अभी तक जितने भी तजुर्बे मिले उन सभी को पन्नो में उतार दिया है। कुछ उर्दू और कुछ हिंदी के शब्दों से बुनी हुई ये कविता रूपी चादर आपको सुकून का एहसास दिलाएगी ऐसी उम्मीद रखता हूं ।
मन की उलझन : कुछ कही कुछ अनकही
SKU: 9780463657249
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