Description of the Book:
प्रकृति और मन, किसी भी व्यक्ति के जीवन के विभिन्न पड़ाव पर बहुत ही अलग और फिर भी एक-दूसरे से संबंधित विषय हो सकते हैं। यह पुस्तक कुछ ऐसी कविताओं का एक संग्रह है, जो कि प्राकृतिक नियमों और उनके अस्तित्व का मानवीय भावनाओं पर प्रभाव से प्रेरित हैं। मन निरंतर गतिशील होता है; जैसे कि प्रकृति में नदी, मौसम और जीवन का हर पहलू गतिशील है।
मन और प्रकृति
SKU: 9789360943424
₹110.00Price
Author's Name: MADHULIKA LAKRA
About the Author: मधुलिका लकड़ा , उनके स्कूली शिक्षा के दिनों से ही कविता में बेहद रुचि रखती हैं। वो मुख्यतः हिन्दी भाषा में लिखती हैं। उनका विश्वास है कि व्यक्तियों को विभिन्न सामाजिक मुद्दों के प्रति संवेदनशील बनाने में, कविताओं की एक बेहद अहम भूमिका होती है। एक कला के रूप में और समाज की अभिव्यक्ति के रूप में, काव्य के प्रति उनका गहरा जुड़ाव है। वो उम्मीद करती हैं कि हिन्दी भाषा के वर्तमान पीढ़ी के भावी कवियों को समाज को बदलने में कविताओं के महत्व के प्रति प्रेरित कर सकें ; साथ ही वो लोगों के व्यक्तिगत प्रगति में भी अपनी कविताओं को एक सहायक के रूप में देखना चाहती हैं जबकि पाठक प्रगति, शोक , क्षति, जीत एवं अनगिनत मानवीय भावनाओं व जीवन पड़ावों से गुजर रहे हों। Book ISBN: 9789360943424
.png)
