मोह-मोह के धागे किताब में शब्दों का वह संसार है जो प्रेम, करुणा और संवेदनाओं के सागर से निकली है। वैसे तो ऐसा कोई दिल नहीं, जिसमें प्रेम और करुणा की भावनाएं हिलोरें न लेती हों। शब्दों की यह दुनिया गांव की पगडंडियों से सुदूर अमेरिका-साइबेरिया तक फैली है। इसमें मां का ममत्व है तो प्रेयसी का प्यार भी। इसमें यार-दोस्तों की चुहलबाजी है और शाश्वत बहते समय की सीख भी। इसमें भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झीलों में से एक सांभर लेक में देश की सबसे बड़ी पक्षी त्रासदी का शाब्दिक चित्रण भी है। जो एक लंबी कविता के रूप में मेहमान परिंदों-फ्लेमिंगो का शोक गीत बन गया है।
मोह-मोह के धागे
SKU: 9789369541591
₹110.00Price
Author's name: HARISH MALIK About the Author: इस काव्य संग्रह के लेखक हरीश मलिक करीब तीन दशक से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रीय हैं। राजस्थान पत्रिका जयपुर में राज्य संपादक और कई जगह स्थानीय संपादक रहे लेखक ने दैनिक भास्कर, अमर उजाला, दैनिक जागरण, हरिभूमि, न्यूज18 नेटवर्क आदि राष्ट्रीय मीडिया के तीनों माध्यम (प्रिंट, डिजिटल और टीवी) में अपनी सेवाएं दीं हैं। चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और राजस्थान के कईं प्रमुख शहर और राजधानियां इनकी कर्मभूमि रही हैं। संप्रति वे देशसेवा के कार्य में मन-प्राण से जुटे हुए हैं। Book ISBN: 9789369541591
.png)
