"मृत्युलोक" एक आत्ममंथन की यात्रा है, जो यह प्रश्न उठाती है—क्या जीवन केवल जन्म और मृत्यु के बीच की यात्रा है, या आत्मा की मुक्ति की खोज? यह पुस्तक मनुष्य के भीतर छिपे रावण रूपी दस विकारों — क्रोध, मत्सर, मोह, लोभ, काम, मद, अहंकार, अन्याय, अमानवता और झूठ — को पहचानने और त्यागने की प्रेरणा देती है। लेखक दीपक संखलेचा 'राज़', अपने अनुभवों व चिंतन के माध्यम से पाठकों को प्रेम, करुणा, विवेक, क्षमा और अंततः मोक्ष की ओर ले जाने वाली राह दिखाते हैं। यह पुस्तक आत्मबोध का एक सशक्त दर्पण है।
मृत्युलोक
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