"मुझे बोलना नहीं आता" उन लोगों की किताब है जो चुप इसलिए नहीं रहते क्योंकि उनके पास कहने को कुछ नहीं, बल्कि इसलिए कि हर बात आसानी से कही नहीं जा सकती। यह कविता-संग्रह प्रेरणा को उत्साह नहीं, अनुशासन मानता है। भक्ति को पलायन नहीं, जिम्मेदारी का स्मरण समझता है। और समाज पर तंज मनोरंजन नहीं, उस चुप्पी पर सवाल है जो अक्सर सहमति बन जाती है। यह पुस्तक सुकून नहीं, ईमानदार आत्मसंघर्ष की मांग करती है।
मुझे बोलना नहीं आता !
Author’s Name: मयंक शर्मा
About the Author: मयंक शर्मा एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, जो कविता को आत्म-अनुशासन और आत्म-समीक्षा का माध्यम मानते हैं। उनका लेखन प्रेरणा, भक्ति और सामाजिक चेतना से जुड़ा है लेकिन बिना मीठे आश्वासन या दिखावटी आदर्शों के। उनके लिए प्रेरणा का अर्थ उत्साह नहीं, बल्कि रोज़ खुद से कठिन सवाल पूछने की ईमानदारी है। "मुझे बोलना नहीं आता" उनकी कविताओं का पहला संग्रह है, जिसमें चुप्पी, तंज और आत्मसंघर्ष एक साथ संवाद करते हैं। यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है जो बेहतर बनना चाहते हैं बिना खुद से झूठ बोले।
Book ISBN: 9789375106319
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