ये कविता संग्रह भावनाओं का वो गुलिस्ता है जो बालपन की चंचलता और सपने, माता पिता के जीवन का दर्शन, युवावस्था से जुड़े संघर्ष , विवाह और रिश्तों से जुड़ी उलझनों के साथ-साथ प्रकृति से मिली प्रेरणा जैसे भावों को एकसाथ प्रस्तुत करती है । वो सभी लोग जो इनमें से किसी भी भावनाओं से ख़ुद को जुड़ा हुआ महसूस करते हैं, २१ कविताओं की ये शृंखला उन्हें ज़रूर पसंद आएगी ।
भावों का विस्तार, मन ही है आधार ।
SKU: 9781807156282
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Author’s Name: सुम्मी दत्ता
About the Author: "कविताओं की इस शृंखला को लिखने वाली कवियत्री का नाम सुम्मी दत्ता है। ये एक गृहणी हैं । इनका हिंदी का ज्ञान सिर्फ़ कक्षा बारहवीं तक पढ़ाए जाने वाले किताबों तक सीमित है । इसके आगे की पढ़ाई उन्होंने जैवप्रोद्योगिकी के विषय में पीएचडी तक हुई है।इनकी शिक्षा दीक्षा रांची में हुई है । इन्होंने NC State University, Raleigh, USA, में दो साल तक Post Doctorate का भी अनुभव प्राप्त किया है। समय के साथ जीवन में आने वाले बदलावों ने इन्हें कविता लिखने के लिए प्रेरित किया है ।"
Book ISBN: 9781807156282
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