Description of the Book:
जब तक मैं हूं, तब तक मेरा जहान है। इस रंग बदलती दुनिया में अपने वजूद को अपना-सा रखना ही कमाल है, वरना दस्तूर के मुताबिक़ ढल जाना ही वाजिब लगता है।
जबसे इंसानों ने खाता रखना सीखा, इंसान बाकियों से आगे निकला, क्योंकि अगले राहियों को राह के बारे पिछले ने बता जाना शुरू किया। इस रीत में एक क़तरा "बावजूद"।
बावजूद
SKU: 9789360942250
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Author's Name: अनुव्रत बंद्योपाध्याय "फ़हम"
About the Author: "अनुव्रत बंद्योपाध्याय ""फ़हम"" की पैदाईश बंगाल के नदिया जिले के कल्याणी शहर में १९९७ के २५ जून को हुई। मां विनीता एक मशहूर फ़नकारा हैं, पिता मुकुल बंद्योपाध्याय भी तख़्लीक़ मिजाज़ के हैं। ये लगाव और हौसला घर से ही इब्तिदा होते हैं, हालांकि उसूलों पर चलने की कोशिश और दुनिया की थोपी दुनियादारी का असर है ""बावजूद""। बदौलत पिता की नौकरी इन्होंने अपना बचपन बोकारो थर्मल, झारखण्ड में गुज़ारा। केंद्रीय विद्यालय में तालीम के दौरान ही बहुत से ज़ुबानों में अदबिय्यात में दिलचस्पी पनपी, जिसे उस्तादों के हौसले और दर्स ने बंदगी बनाया।" Book ISBN: 9789360942250
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