Description of the Book:
हम सब जब अपने जीवन में अक्सर जब किसी कठिनाई से जूझते है तो एक पथप्रदर्शक को ढूँढते है । कभी कभार हमें राह दिखाने वाला मिल जाता है परंतु बहुत बार जब हमें कोई राह दिखाने वाला नहीं मिलता तो हम निराश हो जाते है ।कई बार राह दिखाने वाला भी हमें पर्याप्त सुझाव नहीं दे पता और तब हम सामने आई हुई परेशानी के आगे घुटने टेकने लगते है और खुद को हारा हुआ महसूस करते है । इसकी कई वजह हो सकती है जैसे कि जी हमें राह दिखा रहा है वो उतना सक्षम नहीं है या फिर शायद जिस परिस्थिति में हम है वो हमारे आसपास किसी ने अनुभव नहीं करी है । ऐसे में अगर हम किसी से बाहर से सहायता खोजने कि जगह अगर हम अपने अंदर ही इन सवालों के जवाब ढूँढने लगे तो जवाब सबसे बेहतरीन मिलता है । जो कि सही होता है किसी भी परिस्थिति में क्यूँकि हमारे अंदर की आवाज़ कभी हमें हतोत्साहित नहीं करती और अंत में हम वो करने के लिए सजग होते है जो सही है और करणीय है । परंतु अपने अंदर की आवाज़ तक पहुँचूँ कैसे ये अपने आप में एक बहुत बड़ा सवाल है । और इस सवाल का सिर्फ़ एक ही जवाब है साक्षात श्री कृष्ण ॥ उनके कमल मुख से प्राप्त श्रीमद् भागवद गीता ही केवल एक उपाय है जो व्यक्ति को खुद की चेतना तक पहुँचाने में कारगर सिद्ध है । यह संस्करण एक छोटा सा प्रयास उन सभी लोगों के लिए जो अपने जीवन का उद्देश्य खोज रहे है, जो अपने अपने जीवन में किसी ना किसी प्रकार से उलझ गए ही और उस उलझन से मुक्ति ढूँढ रहे है और वो लोग जो श्रीमद् भागवद गीता पढ़ना चाह रहे है परंतु कहा से शुरू करे समझ नहीं पा रहे है । उन सभी के लिए उनके जीवन में एक नया सोपान सिद्ध होगी । हम ऐसी आशा करते है ।
श्री कृष्णम शरणम ममः
प्रथम पग ।
Author Name: Uday arun Deshpande About the Author: The writer is born and brought up in Bhopal, Madhya pradesh. Professionally having degree in ME/MTech in Electical Engineering, currently working as Senior Business Analyst. He is artist by choice who loves to illustrate devotion & spirituality using different art forms like writing, sketching, Mandala, leaf art, acrylic art and many more. His all art forms are highly motivated by Shree Krishna. Looking forward to do more research & write on Indian spiritual roots. Book ISBN: 9789395620215
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