Description of the Book:
"स्वयं स्वत: अंकुरित गीत है कविता।
दिल की गहराइयों से निर्झर बह कर निकलती है कविता।मेरे कविता संग्रह का शीर्षक है ""प्रकृति से जिंदगी तक""
इन कविताओं में प्रकृति के प्रति मेरे प्रेम की झलक दिखाई देगी, वहीं जिंदगी के खट्टे-मीठे अनुभवों की झलक भी दिखाई देगी। मन में आने वाले विचारों को लयबद्ध तरीके से रखने में मुझे आनंद आता है, और वही विचार कविता के रूप में कागज पर उतर जाते हैं। किसी वस्तु, व्यक्ति, प्रकृति, परिस्थिति को देखकर कभी कभी स्वत: ही मन में कुछ विचार आ जाते हैं और मैं उन विचारों को तुरंत शब्दों में बांधकर लिखना शुरू कर देती हूं।
इन्हीं विचारों से प्रेरित कविताओं का संग्रह इस किताब में प्रस्तुत कर रही हूं।"
प्रकृति से जिंदगी तक-जरा मुस्कुरा ऐ जिंदगी
Author's Name: मनीषा कुलकर्णी
About the Author: "नाम - मनीषा कुलकर्णीशिक्षण - एम.ए., बीएड, बी म्यूजिक रूचियां - पढ़ना, लिखना,संगीत,योग मैं कोई कवि नहीं हूं फिर भी अपने मन के भावों को कागज पर उतारने की कोशिश करती हूं। बचपन से कविता लिखने का शौक है,बचपन में जब भी खत लिखती थी, खत के अंत में दो लाइन की कविता लिख कर खत को समाप्त करती थी।मैं कविता प्रशंसा पाने केलिए नहीं अपितु मन की प्रसन्नता के लिए करती हूं।कविता कवि की भावनाओं को प्रकट करने का एक सशक्त माध्यम है।मुझे प्रकृति से प्रेम है,लोगो से भावनिक रूप से जुड़े रहने में आनंद मिलता है, इसलिए मेरी कविताओं में आपको इसकी झलक दिखाई देगी।" Book ISBN: 9789363308770
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