ये रचना संजीव के , जीवन को उसकी यथास्थिति में देखने का सहज प्रयास भर है फिर चाहें वो प्रकृति हो रिश्ते हों उनकी कमियां हों खूबियां हों । जीवन किस तरह किन किन चेहरों से अपनी ऊर्जा प्रकट करता है । कैसे वो तमाम सफलताओं और नाकामियों के बावजूद निरन्तरता रखता है और जैसे जैसे हम उसके इन रंगों को समझने लगते हैं वो हर छोटी बड़ी सजीव निर्जीव वस्तु में प्राण फूंक देता है फिर हर एक शय को ज़बाँ मिल जाती है और वो आपके करीब बैठ कर अपने किस्से आपको सुनाए जाती है आप बस उनकी ज़बान में उनको रक़म करने का माद्दा भर रख सकते हो । ये याराने इतने गहरे हो जाते हैं कि आपको तन्हां देखा और वो आपके बाजू में आ बैठते हैं कभी गुदगुदाकर कभी मुस्कुराकर कभी गीली पलकों की शम्मे सजाकर ।
Author Details :
Author's Name: Sanjeev Raajsingh parmar
About the Author: संजीव का जीवन विविधताओं से भरा गुज़रा है पिता की नौकरी के साथ शहर शहर स्थानांतरित हुए फिर भी एक गाँव जहां सारी छुट्टियाँ बीतीं मन में बसा रहा ये द्विआयामी जीवन अगणित आयामों से मिलाता रहा । राजस्थान के बीकानेर में जन्म जयपुर ,धौलपुर में स्कूली, विश्व विद्यालयी और फैशन डिजाइनिंग शिक्षा ,आकाशवाणी जयपुर पर कविता पाठ ,बीस वर्ष मुंबई में सफल कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर का कार्य , साथ ही साथ गाँव की जीवनचर्या और खेती बाड़ी से लगातार जुड़ाव ने उनकी रचनात्मकता को सहज सरल बनाये रखा । 2003 में कश नामक काव्यसंग्रह प्रकाशित 2023 में सम्राट पृथ्वीराज हेतु बेस्ट कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर का फ़िल्फेयर नॉमिनेशन 2021 में बागी भोज नामक लघु फ़िल्म और 2024 में फीचर फिल्म चम्बल पार का निर्माण निर्देशन आर्ट ,कॉस्ट्यूम और गीत लेखन
Book ISBN: 9781807155148
.png)
