'धूप के गांव में साये' कविता के धरातल पर अवतरित सुभाष प्रेमी 'सुमन' की तीसरी पुस्तक है जिसमें उनकी अठासी रचनाएं ( हिंदी ग़ज़लें एवं गीत ) सम्मिलित हैं। इन रचनाओं में जहां सादगी और शालीनता से ओतप्रोत यौवन की अनुरक्ति की अभिव्यक्ति छलकती है तो वहीं, दूजी ओर, आधुनिकता के प्रति उदासीनता और आक्रोश की भावनाएं एवं समसामयिक विषयों के प्रति जागरूकता झलकती है। गीतों में गेयता एवं लयात्मकता प्रखर है तो ग़ज़लों में परंपराओं के निर्वाह के साथ-साथ प्रयोगात्मकता का प्रयास भी मुखर है।
धूप के गांव में साये
Author’s Name: सुभाष प्रेमी 'सुमन'
About the Author: श्रीनगर (कश्मीर) की सुरम्य उपत्यका में खिले 'सुमन' (सुभाष प्रेमी) को शब्दों के साथ खेलने की कला पिताश्री प्रेमनाथ प्रेमी' से विरासत में मिली। बहुमुखी प्रतिभा के धनी लेखक के इन्द्रधनुषी व्यक्तित्व में संगीत, अभिनय, मंच संचालन, संपादन, वीडियो-निर्माण, प्रसारण जैसे अनेक रंग विद्यमान हैं। उनकी रचनाओं में भावप्रवणता, लयात्मकता, संवेदना, श्रृंगारिकता, अनुभव और आशावादिता के स्वर मुखरित हो उठते हैं।दो पुस्तकें 'अक्षरों के इंद्रधनुष' और 'मेरी डफ़ली, मेरा राग' प्रकाशित; काशी हिन्दी विद्यापीठ द्वारा विद्या-वाचस्पति (डाक्ट्रेट) की मानद उपाधि से विभूषित।वर्तमान में 'दूरदर्शन-कशीर' चैनल की कार्यक्रम - पूर्वावलोकन समिति के मनोनीत सदस्य।
Book ISBN: 9798900812632
.png)
