'देहरी का ताला' कविता संग्रह है। इसमें प्रेम है, पलायन की पीड़ा है, समाज की विडंबना है। कभी माई के दूर जाने की पीड़ा, कभी बबुआ (पिता जी) की नसीहतें, कभी गांव घर की यादें, कभी समाज की किसी विडंबना ने बेचैन किया तो उसे लिख दिया। शब्दों में भाव भरने का प्रयास और यदि वही भाव, पाठक तक उसी रूप में प्रकट हो जाए, वही तो कविता है।
देहरी का ताला
Author’s Name: Prabhakar Mishra
About the Author: प्रभाकर मिश्रा पेशे से पत्रकार हैं। इनका जन्म बिहार के गोपालगंज जिले में हुआ था। इन्होंने टीवी जर्नलिस्ट के तौर पर कई न्यूज चैनलों में काम किया है। प्रभाकर मिश्रा ने इससे पहले दो पुस्तकें लिखी हैं। पहली पुस्तक ' एक रूका हुआ फैसला: अयोध्या विवाद के आख़िरी चालीस दिन', राम जन्मभूमि से जुड़े अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बारे में है। दूसरी पुस्तक ' किसान बनाम सरकार: आंदोलन की कहानियां', दिल्ली सीमा पर एक साल से अधिक समय तक चले ऐतिहासिक आंदोलन पर आधारित है। प्रभाकर मिश्रा ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई की है। इन्होंने क़ानून की पढ़ाई मगध विश्व विद्यालय, गया से की है। पत्रकारिता के साथ साथ प्रभाकर मिश्रा अध्ययन अध्यापन से भी जुड़े हुए हैं।
Book ISBN: 9781807150150
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