“दूसरा किरदार” शेर, शायरी, ग़ज़ल और नज़्मों का एक एहसास भरा सफ़र है।कलमकार कर्ण ने इनमें उन भावनाओं को उतारने की कोशिश की हैजो कभी दिल में ठहर गईं, तो कभी ज़िंदगी के साथ बह चलीं।कभी मोहब्बत, कभी तन्हाई, कभी हौसला —हर रचना एक नए एहसास की झलक है,जो शायद आपके भीतर भी कहीं बसती हो।
दूसरा किरदार
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