इंद्रधनुष में जिस तरह सात रंग समाहित होते हैं वैसे ही इन कविताओं में जीवन के लगभग सभी रंग देखने को मिलेंगे।खुशी है तो दर्द भी, प्यार है तो विछोह भी , विश्वास है लेकिन विश्वासघात भी, मां का प्रेम है तो देशभक्ति की धार भी ....आइये रंगों के इस समुद्र में उतरकर देखें।आपकी प्रज्ञा
Author Details :
Author's Name: पूनम सारस्वत 'प्रज्ञा'
About the Author: पूनम सारस्वत 'प्रज्ञा' जी 1 अक्टूबर को अलीगढ़, उत्तर प्रदेश में जन्मीं। यहीं इनका लालन-पालन व स्नातकोत्तर तक की शिक्षा पूर्ण हुई। वर्तमान में बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षिका हैं। भ्रमण, फोटोग्राफी और पेंटिंग का विशेष शौक है। ज्योतिष में विशेष रुचि के चलते ये टैरो कार्ड रीडिंग, कुंडली विश्लेषण व वास्तु में भी विशेषज्ञता रखती हैं। अभी यह समसामयिक विषयों पर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लिखती रहती हैं। इनके अभी तक पांच साझा संग्रह- बोलबटोही, काव्यात्मा,कविताई, भावात्मक काव्य व हौसला आ चुके हैं। इस कविता संग्रह में उन्होंने जीवन रुपी इंद्रधनुष के विभिन्न रंगों का संयोजन लयबद्ध किया है
Book ISBN: 9789375106487
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