Description of the Book:
तिश्नगी, यह वह प्यास है जो हम सब में है। प्यास ऐसी, जो किसके लिए है, शायद हम कभी न भी जानें, लेकिन कितनी गहरी है, यह हर पल जानते हैं। कोई इस प्यास को बुझाना चाहता है तो कोई इसकी गहराई बढ़ाना चाहता है, और इसी गहराई में डूब जाना चाहता है। ऐसी ही कुछ लहरों का सागर है यह कविता-संग्रह, तिश्नगी।
तिश्नगी-गहराई की प्यास
SKU: 9789370922129
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