"तुम लौट कर कभी मत आना" केवल कविताओं का संकलन नहीं, बल्कि एक आत्मिक यात्रा है—वह यात्रा जहाँ शब्द भावनाओं का रूप धरते हैं और संवेदनाएँ अर्थों का संसार रचती हैं। यह संग्रह उन अनुभवों का प्रमाण है जिन्हें मन अक्सर कह नहीं पाता, परंतु चुपचाप जीता रहता है। यहाँ आत्ममंथन की बेचैनी है, अस्तित्व की खोज है, और जीवन को उसके सूक्ष्मतम रूप में समझने का प्रयास भी। हर कविता एक प्रश्न की तरह जन्म लेती है और एक उत्तर की तरह ठहर जाती है। पाठक जब इन पंक्तियों से गुजरता है, तो वह केवल कवि की दुनिया में प्रवेश नहीं करता, बल्कि अपने भीतर की अनकही परतों को भी पढ़ने लगता है।यह संकलन संवेदनशीलता का दर्पण है, जहाँ हर शब्द आत्मा की तहों में उतरकर उसे नया उजाला देता है। यह वही साहित्यिक अनुभव है जो मन को स्थिर भी क
तुम लौट कर कभी मत आना...
SKU: 9789373146409
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Author’s Name: Dr. Anupama Mishra
About the Author: डॉo अनुपमा मिश्रा, एक कुशल प्रशासिका शिक्षिका, लेखिका और सहोदया स्कूल के समूह सहचर्या की अध्यक्ष भी हैं। इनका जन्म 5 दिसम्बर, 1967 को हुआ और इनकी परवरिश राबर्ट्सगंज जैसे छोटे नगर में हुई। यह एक अपरिवर्तनवादी परिवारिक वातावरण में पली बढ़ी, परन्तु फिर भी इन्होंने अपने इर्द-गिर्द स्वतंत्रता के स्वाद को भली-भाँति चखा है। इनका तीन भाषाओं हिन्दी, अंग्रेजी और संस्कृत पर पूर्ण नियंत्रण है।
Book ISBN: 9789373146409
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