Description of the Book:
मनुष्य का सम्पूर्ण जीवन एक मृगमरीचिका पर आधारित होता है । जीवन आसान होता है, इसे कठिन, हमारी महत्वाकांक्षाएं बना देती हैं, ये महत्वाकांक्षाएं एक विचित्र प्रकार की मृगमरीचिका, जिसे हम अंग्रेजी में या वैज्ञानिक भाषा में "मिराज" कहते हैं, नाम का भ्रम गढ़ती हैं । इस पुस्तक की सभी कविताएं, एक प्रकार की मृगमरीचिका है, मृत्यु से पहले और जन्म लेने के उपरांत हम बीच में जो भी स्वास लेते हैं, और कईं प्रकार के स्वप्नों को देखते हैं, उनको सत्य करते हैं, जो पूर्ण स्वप्न न हो सके तो शोक करते हैं, गिरते हैं, लड़ते हैं, संभाल कर स्वयं को उठते हैं, दौड़ते हैं, फिरसे किसी नई मृगमरीचिका को जीवंत करके उसके पीछे भागते हैं, हर बार समीप आते आते जब वो छूट जाता है, तो दिशाहीन बैठकर निराश होते हैं ।
जीवन मृगमरीचिका
Author's Name: अभिलाषा भट्ट
About the Author: अभिलाषा भट्ट भारत की एक कवियत्री हैं। उनका जन्म उत्तराखंड में हुआ और वे दिल्ली में पली-बढ़ीं। उनके पास इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री है। वे एक डिजिटल मार्केटर और कंटेंट राइटर हैं। उन्होंने चार किताबें लिखी हैं, जो सभी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। वे पोएट्स यूनाइट वर्ल्डवाइड नामक अंतर्राष्ट्रीय कविता समाज की सदस्य हैं। उन्होंने कई संकलन प्रकाशित किए हैं। उनकी कविताएँ कुछ अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं और ऑनलाइन कविता प्लेटफ़ॉर्म पर प्रकाशित हुई हैं। Book ISBN: 9789370925762
.png)
