Description of the Book:
"ख़ामोशी बोल उठी" एक ऐसी शायरी-संग्रह है जो उन लम्हों को आवाज़ देती है,
जो अक्सर दिल में दफन रह जाते हैं।
यह किताब मोहब्बत, जुदाई, अधूरे रिश्तों, और खामोश दर्द की नज़्मों का सिलसिला है —
जो हर उस दिल को छू सकती है जो कभी टूटा है,
कभी प्यार में भीगा है,
या जिसने किसी बिना अल्फ़ाज़ के अलविदा को सहा है।हर पन्ना एक भाव है,
हर नज़्म एक अधूरी दुआ,
हर शेर एक ख़ामोशी की चीख़।
यह किताब उन जज़्बातों का आईना है जिन्हें हम महसूस तो करते हैं,
मगर कह नहीं पाते।अगर आपने कभी किसी को बेइंतिहा चाहा हो,
या बेआवाज़ बिछड़न महसूस की हो —
तो यह किताब आप ही के लिए है।
ख़ामोशी बोल उठी — जिन बातों को लफ़्ज़ न मिले
SKU: 9789369531523
₹110.00Price
Author's Name: Prantik Panigrahi
About the Author: "प्रांतिक — एक ऐसा नाम, जो शब्दों से रिश्ते बनाना जानता है।वे एक Transformational Coach, Life Coach, और तीन पुस्तकों के लेखक हैं।मगर दिल से, वे एक जज़्बाती शायर हैं —जो ख़ामोशियों को भी लफ़्ज़ दे देना जानते हैं।उर्दू शायरी से गहरा जुड़ाव रखने वाले प्रांतिक,अपनी कविताएं देवनागरी लिपि में लिखते हैं —ताकि वो हर दिल तक पहुँच सकें जो जज़्बातों की भाषा समझता है,भले ही लिपि न पढ़ पाता हो।""ख़ामोशी बोल उठी"" उनकी पहली प्रकाशित शायरी-संग्रह है,मगर हर नज़्म में उनके जीवन की परतें छुपी हैं —मोहब्बत, टूटन, जुड़ाव, और आत्मा से निकलते भाव।प्रांतिक मानते हैं:"जो दिल से लिखा जाए, वो कभी पुराना नहीं होता।" Book ISBN: 9789369531523
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