Description of the Book:
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी होने के साथ साथ स्वयं में एक व्यक्तिगत परिचय भी है, जो कभी हँसता है कभी मुस्कुराता है तो कभी अपने आँसुओं को छिपाता भी है। कभी प्रेम में स्वप्नों में एकाएक खो सा जाता है तो कभी समाज में हो रहे कर्मो से खुद को अलग नहीं कर पाता, ये रूठता भी है अपनो से और अपनों को मनाने की ज़िद भी करता है। इस पुस्तक में रचित कविताओं के माध्यम से कवित्री ने अपनी भावनाओं को पंक्तियों में सजा कर आपके सबके मन के दरवाज़ों को खटखटाने की कोशिश की है, इस पुस्तक में कहीं प्रेम का चित्रण है तो कही वियोग की छवि ,कही खुशिओं की रचनायें है तो कही अनयास ही की गई ख़ुद से बातें।हैंमें यदि कहा जाए तो यह संग्रह है विभिन्न भावनाओ का, 'एक छोटा सा प्रयास हर किसी तक पहुँचने का' ये हमारा सुनिश्ति विश्वास है की भावनाओं को जब शब्दों की सूरत मिल जाती है,तो अधूरी कविताओं में भी पूर्णता आ जाती है। हम ये आशा करते हैं कि आपको हमारा ये प्रयास पसंद आएगा।
किंशुक: एक कोशिश विचारों को सजाने की
Author's Name: Pragya Tiwari About the Author: प्रज्ञा तिवारी कानपुर(उत्तर प्रदेश) की निवासी है, जो कि एक परामर्श मनोवैज्ञानिक है। उनकी पढ़ाई उनके मूल निवास कानपुर और लखनऊ से हुई है। कविता लेखन में उनकी रुचि बचपन से ही रही है, जिसका एक कारण उनके नाना श्री का कवि होना रहा है। यह पुस्तक उनकी पहली रचना है जो प्रकशित हुई है। कविता लिखने की प्रेरणा उन्हें उनके विचारों से, मित्रो से तथा कभी कभी उन अनुभवों से भी मिलती है जो वो अपने पेशे में साझा करती है। ISBN: 978-93-95413-02-2
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