Description of the Book:
जीवन एक युद्ध है। हर राह पर, एक दीवार तुम्हें रोकने को खड़ी है, पर तुम रुकते नहीं हो। तुम उस दीवार को सेंध लगाते हो और आगे बढ़ते हो; एक और राह ओर चलने को, एक और दीवार तोड़ने को।
तुम बढ़ते हो, और जीतते हो और खुद को खुद में काबिल बनाते हो और दूसरों से पृथक राह बनाते हो।
पर फिर जब ठहरते हो, तो आभास होता है कि ये युद्ध जीत तो रहे हो, पर अपने अंतर में कहीं हार भी रहे हो शायद। आत्मा शिथिल हो रही है। और समय मन को तोड़ रहा है।
इसी शिथिलता को भगाने का एक छोटा सा प्रयास हैं मेरी कविताएं। एक हल्की सी चिंगारी बनने की कोशिश है। तुम्हें आत्मशिथिलता से जगाने का प्रयास है, मेरे शब्दों का ये उन्माद।
उन्माद
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Author Name: NIKITA KAUSHIK About the Author: Confluence of the tranquility of Prayag and the heartiness of Delhi, she is Nikita Kaushik born in Allahabad, and working from last 6 years in Delhi. Nikita knows very well how life runs faster than metro yet she knows to make way for her writing in the busy schedule. Words are so much liked by her, that she can not imagine her day passed without reading something or writing a short poem. Book ISBN: 9789394573635
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