Description of the Book:
जीवन एक युद्ध है। हर राह पर, एक दीवार तुम्हें रोकने को खड़ी है, पर तुम रुकते नहीं हो। तुम उस दीवार को सेंध लगाते हो और आगे बढ़ते हो; एक और राह ओर चलने को, एक और दीवार तोड़ने को।
तुम बढ़ते हो, और जीतते हो और खुद को खुद में काबिल बनाते हो और दूसरों से पृथक राह बनाते हो।
पर फिर जब ठहरते हो, तो आभास होता है कि ये युद्ध जीत तो रहे हो, पर अपने अंतर में कहीं हार भी रहे हो शायद। आत्मा शिथिल हो रही है। और समय मन को तोड़ रहा है।
इसी शिथिलता को भगाने का एक छोटा सा प्रयास हैं मेरी कविताएं। एक हल्की सी चिंगारी बनने की कोशिश है। तुम्हें आत्मशिथिलता से जगाने का प्रयास है, मेरे शब्दों का ये उन्माद।
उन्माद
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