Description of the Book:
"आदमी जब पैदा होता है और मरता है इसके बीच में वह न जाने क्या क्या करता रहता है और उसकी की गयी करतूतें उसके खाते में दर्ज होती हैं. मैं ये नहीं कहता कि कवितायें उनको सजा देंगी, कविताएं उनके हक में फैसला देंगी, कविताएँ उन्हें सबक देंगी, कि कविताएं बदला लेंगी, कि कविताएं ज्ञान देंगी, कि कविताएँ उन सारी चिंताओं पर ध्यान देंगी, जिनसे इंसान को तकलीफ होती है. और कविताएँ ऐसा नहीं है कि असाध्य रोगों का इलाज करेंगी. मगर हाँ कविताये, ये कविताएँ आदमी के चश्मे को साफ करेंगी ताकि वो दूर तक देख सके कि कितना उजाला है और कितना अँधेरा, कितना गहरा है और कितना ऊँचा सन्नाटा कि कितना शोर है और कितना स्पंदन, कितना क्रंदन है और कितना अतिक्रमण.
"
आग और सपने मेरी हथेली पर
Author's Name: अनिल पुष्कर
About the Author: "कवि, उपन्यासकार, आलोचक. जन्म : 02 अक्टूबर 1980, इलाहाबाद. शिक्षा : एम.ए., एम.फ़िल., पी-एच.डी., जे.एन.यू, नई दिल्ली. पोस्ट डॉक्टोरल फेलो, इलाहाबाद विश्वविद्यालय. कविता-संग्रह – राजधानी, 2019. आदिम आवाजें और सात सुरों की बारिश, 2020. तानाशाहों के वारिस, 2020. कविता का गणित और राजनीति, 2022. सुन रहा है कोई, 2022.उपन्यास – अर्गला, 2023 आलोचना – हरिवंशराय बच्चन की अनुवाद-दृष्टि, 2014.अनुवाद - सुबोध सरकार की चुनिन्दा कविताएँ, (बांग्ला से हिंदी) 2022. कविता विशेषांक - उन्नयन-21, 2000. समावर्तन पत्रिका, 2015. रेखांकन, 2019. छठा युवा द्वादश, 2020. इरावती, 2021. हिमतरु, कविता पर कोई संकट नहीं, 2021. ईमेल–apkaveendra@gmail.comमोबाइल–6291413423, वेबसाइट - www.anilpushker.com" Book ISBN: 9789369532520
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