आईना: हर शहर, हर मंज़र, हर एहसास और रूह की अपनी दास्तान एक संवेदनशील कविता-संग्रह है, जो शहरों, यात्राओं और जीवन के भीतर चलती भावनात्मक हलचलों को शब्द देता है। इस संग्रह में गाँव की सादगी, महानगर की बेचैनी, बचपन की स्मृतियाँ, माँ और रिश्तों की नमी, प्रकृति के प्रतीक, सामाजिक दृष्टि और आत्मचिंतन—सब साथ-साथ चलते हैं। कविताएँ कभी बारिश, नदी और समंदर से संवाद करती हैं, तो कभी समय, तृष्णा और दृष्टिकोण पर प्रश्न उठाती हैं। यह पुस्तक पढ़ने से अधिक महसूस करने का अनुभव है—एक ऐसा आईना, जिसमें पाठक अपने ही जीवन की परछाईयाँ देख सकता है।
Author Details :
Author's Name: Jay Prakash Sahu
About the Author: जय प्रकाश साहू का जन्म मध्यप्रदेश के एक छोटे से गाँव में हुआ, जहाँ सादगी, स्मृतियाँ और शब्द साथ-साथ बड़े हुए। बचपन से ही हिंदी कविता उनके लिए आत्मसंवाद का माध्यम रही। उन्होंने भोपाल से एम.बी.बी.एस. एवं एम.डी. (रेडिएशन ऑन्कोलॉजी) की शिक्षा प्राप्त की और वर्तमान में मुंबई के HCG कैंसर हॉस्पिटल में कैंसर विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत हैं। रोग और पीड़ा से भरी दुनिया में काम करते हुए कविता उनके लिए संवेदना, ठहराव और उम्मीद की भाषा बनी। उनका लेखन शहरों, गाँवों, रिश्तों और रूह के उन एहसासों का आईना है, जो अक्सर अनकहे रह जाते हैं। उनका काव्य अनुभव और संवेदना का ऐसा मेल है, जो पाठक को भीतर तक छूता है और उसे अपने ही जीवन के आईने में देखने के लिए प्रेरित करता है।
Book ISBN: 9789375273400
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