Description of the Book:
"'अब तू अंधकार का आभार व्यक्त कर '
मनीषा केशव कि कविताओं के इस मार्मिक और शक्तिशाली संग्रह में, लेखिका मानवीय अनुभव के अशांत जल में आगे बढ़ते हुए रूपांतरित और विजयी होकर उभरती है। अडिग ईमानदारी और भेद्यता के साथ, छाया का सामना करती है, और ऐसा करते हुए, मानवीय आत्मा के लचीलेपन की खोज करती है। गीतात्मक भाषा और विचारोत्तेजक कल्पना के माध्यम से, वो यहाँ पाठकों को आत्म-खोज, उपचार और अंततः, मानवीय आत्मा के विजय की एक परिवर्तनकारी यात्रा पर ले जाती है।
अंत में कहती है :
""जो अपने जज्बे से,अंधकार समक्ष झुककर जंग जीत गया
वो खुद्दार, अब खुद कि नजर में, ' खुशनसीब ' बन गया.""आभार."
अब तू अंधकार का आभार व्यक्त कर-कृतज्ञता अर्पण
SKU: 9789369546862
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