'अनकहे प्रश्न..अनसुने उत्तर' यह संग्रह मेरे अंतर्मन की आवाज़ है — संवेदनशील मनुष्य की, जो प्रश्न करता है, सोचता है और आपको सोचने पर मजबूर करता है। यहाँ संग्रहित कविताएँ भले ही सीमित विषयों पर हों, पर हर कविता समाज के किसी न किसी पहलू को उघाड़ने की ईमानदार चेष्टा करती है। शिक्षा की खोखली व्यवस्था हो या पानी जैसे जीवनदायी तत्व की उपेक्षा, नारी पर होते अन्याय हों या लोकतंत्र की विडंबनाएं — हर रचना आपकी संवेदनाओं को झकझोरने का प्रयास है।कभी व्यंग्य के धारदार शस्त्र से, तो कभी करुणा के भाव से, ये कविताएँ न सिर्फ सामाजिक यथार्थ का दर्पण हैं, बल्कि आत्ममंथन का निमंत्रण भी। मेरा उद्देश्य यही है — कि हम सोचें, सवाल करें और बेहतर समाज की ओर कदम बढ़ाएँ।
अनकहे प्रश्न .. अनसुने उत्तर
Author’s Name: प्रशांत पितालिया
About the Author: "कवि : प्रशांत पितालियाप्रेरक वक्ता | प्रबंधन विशेषज्ञ | कुशल आयोजक | लेखन और प्रशिक्षण क्षेत्र में विशेष योगदान | प्रबंधन में मूलभूत परिवर्तन लाने के लिए प्रभावशाली सिद्ध हुई अभिनव तकनीकों का प्रयोगशील विशेषज्ञ | स्पष्टता मार्गदर्शक | परिवर्तनकारी प्रशिक्षक | रणनीतिक सलाहकार | बेस्टसेलर पुस्तक लेखक | आध्यात्मिक मार्गदर्शक l जिसे ""स्वप्न बोने वाला इंसान"" (स्वप्न पेरणारा माणूस) के रूप में जाना जाता है।शब्दों और विचारों से लोगों के जीवन में परिवर्तन लाने का कार्य वे वर्षों से कर रहे हैं।""मन प्रशांत"" उनकी अंतर्मन की अनुभूतियों का सामाजिक रूपांतरण है। यह एक प्रेरक, प्रभावी और संवेदनशील यात्रा का कार्यक्रम है l"
Book ISBN: 9789372136227
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