यह किताब महज़ पन्नों का पुलिंदा नहीं है, बल्कि एक आइना है। 'अंतर्मन' उन अहसासों की बानगी है जिन्हें हम अक्सर अपनी रोज़मर्रा की व्यस्तताओं के नीचे दबा देते हैं। जब आप इस किताब को खोलेंगे, तो आप केवल एक लेखक के शब्दों को नहीं पढ़ेंगे, बल्कि आप अपनी ही उन यादों से रूबरू होंगे जो कहीं पीछे छूट गई थीं | यह किताब उन लोगों के लिए है जो भीड़ में होकर भी अक्सर अकेले रह जाते हैं, जो संवेदनशील हैं और जो यह मानते हैं कि रो देना या अपनी कमियों को स्वीकार करना कमज़ोरी नहीं, बल्कि इंसान होने की सबसे बड़ी ख़ूबसूरती है। 'अंतर्मन' आपको ठहरना सिखाएगी। यह आपसे कहेगी कि—"दुनिया की इस दौड़ में थोड़ा सुस्ता लेना लाज़मी है, और जो है, बस उसका 'कदरदान' हो जाना ही ज़िंदगी है।"
अंतर्मन
SKU: 9789375100942
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