यह कविता संग्रह जीवन के उस सफ़र का आईना है, जिसे हम रोज़ जीते हैं, पर अक्सर महसूस करना भूल जाते हैं। लेखक मुकेश प्रजापति ‘मोक्ष’ ने हिंदी सिनेमा में अपने 15 वर्षों के रचनात्मक अनुभव और गहन अवलोकन से मिले विचारों को इन कविताओं के रूप में ढाला है। यह पुस्तक सिर्फ़ कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि रिश्तों की जटिल गांठों, मन की अनसुलझी उलझनों और हर मोड़ पर ज़िंदा रहने वाली असीमित उम्मीदों की एक दास्तान है। इन कविताओं में जीवन के वे देखे और अनदेखे पल शामिल हैं जो हर इंसान को भावनात्मक रूप से छूते हैं। सरल भाषा और गहरे भावों के ज़रिए, यह कृति हमें अपनी ही भावनाओं से रूबरू कराती है। यह उन सभी पाठकों के लिए है जो भावनाओं की ईमानदारी और जीवन के सहज सौंदर्य को तलाशते हैं।
21 लम्हे, एक ज़िंदगी
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