Description of the Book:
"ज़िन्दगी के कितने रंग हैं ? ठीक ठीक बताना मुश्किल है लेकिन इतना पक्का है कि इंद्रधनुष से ज्यादा हैं ज़िन्दगी में
रंग। यह पुस्तक “हथेली पर खड़ी ज़िन्दगी” इन्हीं रंगों का ज़िक्र है। यह संगम है प्रेम कविताओं का, सामाजिक मुद्दों
का, दुःख का, हँसी का, हक़ीक़त का, फ़सानों का, जीवन का और मृत्यु का भी। इस पुस्तक को शुरू से पढ़ के अंत तक जाने की प्रक्रिया में, आप काफी सारे रंगों से वाक़िफ़ हो जाएंगे। इन पुस्तक कि कविताओं को पाठक से जोड़ने के लिए साधरणतम भाषा में लिखा गया है। "
हथेली पर खड़ी ज़िन्दगी
SKU: 9789363304598
₹110.00Price
Author's Name: प्रिया मंजूषा
About the Author: प्रिया मंजूषा बिहार में पटना के एक छोटे से गाँव सोहरा की रहने वाली हैं। उनका जन्म एक किसान परिवार में हुआ। पालन पोषण और शुरूआती शिक्षा गाँव की ही रही। बाद में उच्चस्तरीय शिक्षा के लिए वो पटना और भुवनेश्वर में रहीं। इंजीनियरिंग में स्नाकोत्तर के बाद उन्होंने एक आईटी कंपनी में नौकरी किया । नौकरी के हवाले से उन्हें पुणे और कोलकाता की हवाओं में भी साँस लेने का मौका मिला। वर्तमान समय में गुड़गांव उनका बसेरा है। बचपन में डायरी लिखने की हिदायत, बाद में कविताएँ और कहानियाँ लिखने के शौक में तब्दील हो गया । इसी शौक के तहत हाज़िर हुई ये उनकी पहली किताब "हथेली पर खड़ी ज़िन्दगी"। इसे अपनी मोहब्बत से नवाज़ें! Book ISBN:9789363304598
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