आखिर तुम अपनी आभा के जिर्ण हुए वस्त्र हटाने का फ़ैसला करते हो,एक पूर्ण हुई प्रक्रिया प्रति आभार जताते हो.स्वीकार करते हो कि न जाने कितने युग, सदियाँ और जन्म मरण कि प्रस्तावना ने अपने भाव और प्रभाव से, उनमे रंग भरे थे. उनके विश्वास, अविश्वास से तुम्हारी आभा के सारे अणु जुड़े हुए थे, सितारों के न्यायालय में तुम्हारे नाम कि तारीखे पड़ी थी. उन सारी तारीख पे हाजिर होकर तुमने न्याय प्रति सन्मान जताया था. दो हाथ जोड़कर अपने हिस्से के न्याय का स्वीकार किया था.अब तुमने अपनी शुद्धता प्रमाणित कर दी इसलिए न्यायालय से परितोषिक लेने बुलावा भेजा जाता हैवहाँ तुम जिर्ण वस्त्र पहनकर अभिवादन स्वीकार करने नहीं जा सकते इसलिए उसे त्याग करते हुए,नये वस्त्र धारण किये सन्मान लेने प्रस्तुत होते हो.
स्वीकार किया
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Author’s Name: Manisha keshav
About the Author: "अगर तुम कलामय हो,कला से बेपनाह मुहोब्बत करते हो तब उनकी सारी शर्ते माननी होगीउनकी आराधना के वरतूल में प्रवेश से पहले,अपनी आशिकी उन्हें समर्पित करनी होगीउनके आत्मा तक दीवानो कि तरह पुकार भेजनी होगीतुम्हारे इश्क कि उत्कँठ आरजू एकदिन उसे मजबूर करेगी,तुम्हें आश्लेष में भर लेगीअपनी आधी रौशनी तुम्हें दान कर देगी Bookleaf publication के सहयोग से,लेखिका अपने 7 पुस्तक प्रकाशित कर चुकी है. अपनी गौरवमय सफर में, सन्मान पाकर धन्यता अनुभव कर रही है."
Book ISBN: 9798900812441
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