मानव जीवन को परिभाषित करती प्रस्तुत पुस्तक सांकल कविताओं में जीवन की व्यवस्था के प्रति रोष के साथ ही प्रेमासिक्त मन की कामना को एक अनुपम संसार की अनुभूति कराती है। इनकी कविताओं में प्रेम, राग- द्वेष, उपेक्षा , बिछोह का दर्द, उद्वेग और कुछ कर गुज़रने की आतुरता एक अपनी ही लय में निरंतर प्रवाह की तरह सरकती नज़र आती है। मनुष्य का दुरूह जीवन चरित्र इस पुस्तक में इनकी कविताओं की आत्मा है। सारा अर्थतंत्र उस समय असहाय लगता है जब आर्थिक असमानता और असंतोष व्यक्ति के जीवन यापन को प्रभावित करने का एक कारण बन जाती है। प्रस्तुत पुस्तक एक अनुपम कृति की तरह जीवन को आंदोलित करती है।
सांकल
Author’s Name: राजकिशोर
About the Author: बहुमुखी प्रतिभा के धनी स्वर्गीय राज़ किशोर प्रसाद श्रीवास्तव, डीएवी कॉलेज ,कानपुर से स्नातक करने के साथ ही भिलाई स्टील प्लांट से जुड़ गए। उस समय के अनेक पत्रिकाओं में इनकी रचनाओं को जगह मिली। कालांतर में बोकारो स्टील प्लांट में अपनी सेवा प्रदान करते हुए बोकारो की प्रथम साहित्यिक संस्था भारती साहित्य परिषद के संस्थापक सदस्यों में शुमार रहे। बोकारो स्टील प्लांट में कार्य करते हुए अपनी सेवा के उत्तरार्द्ध में ये बोकारो संगीत कला अकादमी के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहकर उसके संस्थापक सचिव के पद को सुशोभित किया। कर्मशील रहकर बोकारो स्टील प्लांट में एक सफल प्रशासक और यहाँ के साहित्यिक और सांस्कृतिक जगत में अपनी विशेष उपस्थिति दर्ज की।
Book ISBN: 9798900811239
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