प्रेम—एक ऐसी अनुभूति, जिसे शब्दों के दायरे में बाँधना असंभव है।प्यार, इश्क़, मोहब्बत—ये सब प्रेम के अलग-अलग रंग और चरण हैं। माँ और बच्चे का स्नेह, भाई-बहन का अपनापन, पति-पत्नी का समर्पण, प्रिय-प्रियसी की तड़प, या ईश्वर के प्रति भक्ति—हर रूप की परिभाषा भिन्न है, पर मूल सार एक ही है—प्रेम।आज के दौर में जहाँ रिश्तों को नए-नए नाम और सुविधानुसार गढ़े गए स्टेटस मिल जाते हैं, वहाँ कहीं न कहीं भावनाओं की गहराई खोती-सी प्रतीत होती है। प्रेम, जो कभी आत्मा की सबसे शुद्ध ध्वनि थी, अब मानो भीड़ में अनसुनी हो चुकी है। यह किताब उसी अनकहे, अनदेखे और खोए हुए प्रेम की खोज है।
सलोना सा सजन
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