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समंदर सिर्फ़ पानी का नहीं होता — ये वो अहसास है, जो भीतर गहराइयों तक उतरता है।इस कविता संग्रह में हर कविता एक लहर है — कोई शांत, कोई बेकल, कोई टूटती हुई, तो कोई किनारा छूने को बेताब।यह सिर्फ़ कविताओं का संकलन नहीं, बल्कि एक भावनात्मक यात्रा है — आत्मा की परतों से शुरू होकर, उस किनारे तक जाती है जहाँ हम खुद को थोड़ी और गहराई से समझते हैं।अगर आपने कभी प्यार किया है, खोया है, खुद से सवाल किए हैं, या सन्नाटों को सुना है —तो “समंदर” की ये कविताएँ आपको अपने भीतर के समंदर से जोड़ देंगी।

समंदर

SKU: 9798900810843
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  • Author’s Name: निहारिका गुमाश्ता

    About the Author: "निहारिका गुमाश्ता एक उभरती हुई कवयित्री हैं, जो पहली बार अपने काव्य-संग्रह के माध्यम से पाठकों से रूबरू हो रही हैं।वे पेशे से योग शिक्षक, वास्तु विशेषज्ञ और अंक विशेषज्ञ हैं। लेखन उनके लिए आत्मा की अभिव्यक्ति है, और उनकी कविताएँ जीवन की भावनात्मक परतों को सरलता और सच्चाई से उजागर करती हैं।“समंदर” में निहारिका जी ने जीवन के उन पहलुओं को शब्दों में ढाला है, जिन्हें हम अक्सर महसूस तो करते हैं, पर कह नहीं पाते।"

    Book ISBN: 9798900810843

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