हर इंसान का एक अपना सफर होता है, जो शून्य से शुरू होकर मैं तक पहुँचता है। यह किताब उन सभी शब्दों का संग्रह है जो मैंने तब लिखे जब मुझे सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी—खुद को समझने और खुद को पाने की।इस संग्रह में आप अपने भीतरी संवादों, मन के सवालों और अपने आप से कही गई बातों का प्रतिबिंब पाएँगे।
शून्य से मैं तक
SKU: 9798900814711
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Author’s Name: संदीप गुप्ता
About the Author: संदीप गुप्ता एक प्राइवेट सेक्टर में काम करते हैं और उन्हें कविताएँ तथा कहानियाँ लिखना पसंद है।
Book ISBN: 9798900814711
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