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Description of the Book:

 

“विज्ञान की कविताए” पुस्तकमें लब्ज़ कुछ ऐसे कैद हो गए जैसे, कोनिकल फ्लास्क में जाम के साथ सूफी समज की महक। टेक्निकल फिलोसोफि के साये में “ एक मजनूँ ने दिल निचोड़ के अपने लहू से लव लेटर लिखा, टेक्निकली स्मार्ट लैला ने सच्चाई के लिये डिएनए टेस्ट करवायाँ” ! “हाइड्रोजन ना तो हिन्दू होता है” जैसी सेक्युलर साइंस कविता से शुरू की हुई इस सफर ने नेगेटिव इलेक्ट्रॉन और पोज़िटिव प्रोटॉन के झगड़े को बहोत करीब से देखा और स्याही में कैद कर लिया। “प्रकाशसंश्लेषण जैसी बेफिजूल जफ़ा” में ना उलझने की सलाह देने वाली तितली को मीठे मधुरे फूलों के रस का आनंद लेने की बिनती करते पौधे ने पूरी कायनात जीत ली। अंतरिक्ष की आँखों से माँ भारती की मुस्कान देखने की चाह रखने वाले “मेन मेड सॅटॅलाइट” के जज्बे को ईक्कीस तोपों की सलाम। “जिंदगी की मोशन” जैसी कविताओने बेझिझक जिक्र किया की “आज अस्सी की उम्र में डायरी ने आईना दिखा दिया, ता उम्र जिंदगी की मूवमेंट ना लिनीअर थी , ना सर्क्यलर थी ! एक एक पन्ना चुप चाप मजाक करते करते बोल रहा था, “बीट्वीन ध लाइंस” तेरी लाइफ में सिर्फ ब्राउनियन मूवमेंट थी!” । विज्ञान की परिभाषामें घर जले या दीप, सीना जले या दिल, आखिरतार सिर्फ ऑक्सीडेशन होता है, जैसी कविताओ से कविने भूखे मजदूर के भूखकी अगनभी सिर्फ ऑक्सीडेशन मान लेने पर सवाल खड़े किये है। “तेरा ख्याल है कुछ “डार्क मेटर” जैसा, है पर दिखता नहीं, तूं हकीकत है और सामने भी, पर महेसुस होता नहीं।“ जैसी सूफी नझम से कवि की परम तत्व तक पहोंचने की चाह में विज्ञान कुछ ऐसे घुलमिल गया है की अब कयामत तक जुड़े रहेंगे। कवि “मा के हाथों परोसी गर्म रोटी की मिठास, ग्लूकोमीटर से कैसे नापे?” जैसे वाकियामें विज्ञान के परिसीमन को तोड कर ईश्वर से पूछता है की “ये अणु, परमाणु, तत्व, मिश्रण, रसायन... क्या फालतूमें ऐसे घूमा रहा है? बस तू एनर्जी देता रहे, मेरे लिए पूरे जहाँ में कुछ भी “मेटर” ना रहे”।
दूसरे शब्दों मे बयान करूँ तो ईक्कीसवी सदी के विज्ञान के जमानेमें विज्ञान की ईक्कीस कविताओने ईक्कीस मर्तबा सोचा, ईक्कीस बार लहेरे उठी और किस मोड पे शैलाब ने शब्दोंका दामन थाम लिया पता ही नहीं चला।

विज्ञान की कविताएं

SKU: 9789395784818
₹110.00Price
  • Author's Name: Vishal Muliya
    About the Author: Vishal Muliya is a teacher and science communicator. He has been making scientoons (science cartoons) since 2014. His scientoons have been published in various magazines and journals. Along with making science cartoons, he is also writing poems on science that blend philosophy, facts, literature, and history. In the edutainment era, making science exciting and funny is his area of interest. He teaches biology in a higher secondary school and a visiting lecturer at the Government Physiotherapy College in Jamnagar, and he has been teaching for 18 years. He is coaching for NEET also. He is putting interesting facts and figures related to science on his YouTube channel "Vigyan with Vishal Muliya".
    Book ISBN: 9789395784818

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