“लड़की नहीं, लड़ती हूँ मैं” एक शक्तिशाली कविता-संग्रह है जिसमें 21 कविताएँ महिलाओं के जीवन के विभिन्न चरणों और संघर्षों को उजागर करती हैं। यह पुस्तक जन्म से पहले रोकी गई साँसों से लेकर दहेज, घरेलू हिंसा, वैवाहिक बलात्कार, सामाजिक बंधनों और असमानताओं तक की सच्चाइयों को सामने लाती है। हर कविता न सिर्फ़ दर्द और पीड़ा को शब्द देती है, बल्कि औरत की अटूट जिजीविषा और भीतर छिपी शक्ति को भी प्रकट करती है।यह संग्रह पाठकों को झकझोरता है, सोचने पर मजबूर करता है और अंततः यह संदेश देता है कि औरत केवल “लड़की” नहीं, बल्कि वह शक्ति है जो हर ज़ुल्म के खिलाफ खड़ी होकर कहती है — “लड़की नहीं, लड़ती हूँ मैं।”
लड़की नहीं, लड़ती हूँ मैं
SKU: 9798900815398
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Author’s Name: दिव्या सुथार
About the Author: दिव्या सुथार, मूल रूप से राजस्थान से हैं और हैदराबाद में पली-बढ़ी हैं। वर्तमान में वे महिंद्रा यूनिवर्सिटी से BBA LLB की पढ़ाई कर रही हैं। लेखन और रचनात्मक अभिव्यक्ति के प्रति उनकी गहरी रुचि है, और वे सामाजिक वास्तविकताओं, फ़िल्मों और शोध से प्रेरणा लेती हैं। “लड़की नहीं, लड़ती हूँ मैं” उनका पहला कविता-संग्रह है, जो महिलाओं के संघर्ष, धैर्य और शक्ति को आवाज़ देता है। दिव्या का सपना है कि साहित्य को एक ऐसा माध्यम बनाया जाए, जो संवाद को जन्म दे और सार्थक सामाजिक परिवर्तन लाए।
Book ISBN: 9798900815398
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