शायद मैं ये कहूँ कि तुम इसे पढ़ो?तो ये कोई इल्तिज़ा नहीं, न ही किसी वजूद का सवाल है।वजूद तो बस इतना है कि इस लिखावट के हर लफ़्ज़ में वो ख़्वाहिशें और उम्मीदें दबी हैं,जो कभी जुबां तक न आ सकीं।ये लिखाई उनकी आवाज़ है, और तसव्वुर बस इतना, कि जब तुम इन्हें पढ़ो,तो ये आवाज़ तुम्हें अपनी सी लगे।
रश्म
SKU: 9798898651428
₹110.00Price
Author’s Name: कुमार रत्नेश
About the Author: मैं? रत्नेश।
Book ISBN: 9798898651428
.png)
