Description of the Book:
"""ये मेरी और मेरे मालिक कि अंतरंग गुफ़्तगू है "" आध्यात्मिक कविता का एक संग्रह है जो पाठकों को आत्म-खोज और आंतरिक परिवर्तन की यात्रा पर निकलने के लिए आमंत्रित करता है। रहस्यमय और सांसारिक के बीच नृत्य करने वाले शब्दों के साथ, यह पुस्तक प्रेम, करुणा और मानवीय स्थिति के विषयों की पड़ताल करती है। प्रत्येक कविता जागृति की ओर एक सौम्य संकेत है, जो पाठकों को अपनी आत्मा की फुसफुसाहट सुनने और अपने भीतर छिपी सुंदरता और ज्ञान को उजागर करने के लिए प्रोत्साहित करती है। आध्यात्मिक विकास और प्रेरणा चाहने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए यह हार्दिक और उत्साहवर्धक पुस्तक है।
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ये मेरी और मेरे मालिक की अंतरंग गुफ़्तगू है.-सूफियाना संगत
SKU: 9789367390795
₹110.00Price
Author's Name: Manisha keshav
About the Author: "*मनीषा केशव की कविता की विशेषता उसकी सरलता, गहराई और सुगमता है। उनकी कविता पाठकों को प्रतिबिंबित करने, चिंतन करने और अपने स्वयं के आंतरिक ज्ञान से जुड़ने के लिए आमंत्रित करती है।प्रकाशन: मनीषा केशव की कविताएँ विभिन्न संकलनों, पत्रिकाओं और ऑनलाइन प्लेटफार्मों में प्रकाशित हुई हैं। उनका पहला संग्रह, [समझ सको तो अर्थ हूँ, ना समझो तो व्यर्थ हूँ ] इस प्लेटफार्म पर उपलब्ध है और इसे इसकी सुंदरता,अंतर्दृष्टि और इश्क प्रति गहराई के लिए आलोचकों की प्रशंसा मिली है. *I’m so excited to share my brand new book समझ सको तो अर्थ हूँ with you! Published by [@bookleafpublishing], Congratulations! Your Book Has Been Nominated for the 21st Century Emily Dickinson Award - Bookleaf Publishing" Book ISBN: 9789367390795
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