पुस्तक परिचय मेरे अंतर्मन की बातें, अनुभव हैँ हर उस स्त्री का जो समर्पित, कल्याणी और सरल हैँ | सरलता ही उसके उन संघर्षो का कारण बन जाती हैँ जो उसके है ही नहीं |अस्तित्व बोध की आकांशा उसे एक नए पथ पर ले जाती हैँ और विजयी बनाती हैँ |अपमान, अस्तित्व, स्वाभिमान और बूढ़ा दरख़्त मेरे भीतर की चितकार हैँ और निश्चय जीवन की साकात्मकता की | आशा हैँ मेरी यह प्रथम पुस्तिका आपके मन को छूने का प्रयास करेंगी |सभार
मेरे अंतर्मन की बातें
Author’s Name: अंजलि
About the Author: "सुश्री अंजलि, 48 वर्ष की आयु में, शिक्षा के क्षेत्र में 27 वर्षों का एक लंबा और शानदार अनुभव रखती हैं। उनका जन्म और पालन-पोषण दिल्ली के खेड़ा खुर्द गाँव में हुआ, जहाँ उनके माता-पिता दोनों ही शिक्षक थे। शिक्षकों के मार्गदर्शन में पली-बढ़ी अंजलि को बचपन से ही शिक्षा के प्रति गहरा सम्मान और लगाव था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली के प्रतिष्ठित एस.के.वी. मॉडल टाउन से पूरी की। अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने शिक्षण के पेशे को अपनाया और 27 वर्षों तक छात्रों को ज्ञान प्रदान करने में अपना जीवन समर्पित कर दिया। वर्तमान में, सुश्री अंजलि एक हिंदी लेक्चरर के रूप में कार्यरत हैं, जहाँ वे अपनी विशेषज्ञता और अनुभव का उपयोग करके छात्रों को हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति प्रेरित कर रही हैं। "
Book ISBN: 9798900817040
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